सूत की एक गाँठ अलमारी के भीतर रखी चीज़ों का भी अपना एक जीवन होता है। यह बात अनन्या ने बहुत पहले समझ ली थी। शायद तब जब उसने पहली बार किसी पुराने कागज़ को फेंकने से इनकार किया था। शायद तब जब माँ ने उसे डाँटते हुए कहा था कि घर कोई संग्रहालय नहीं होता और उसने हँसकर जवाब दिया था कि हर घर अपने भीतर थोड़ा-सा इतिहास छिपाकर रखता है। तब वह नहीं जानती थी कि एक दिन वही इतिहास उसके सामने आकर उससे सवाल करेगा। उस शाम भी अलमारी खुली थी। नीचे के खाने में पुराने कागज़ों , अधूरी चिट्ठियों , सम्मेलन के परिचय-पत्रों और कुछ पीले पड़ चुके टिकटों के बीच वह सूत रखा था.... वर्धा से लाया हुआ सूत। एक मामूली-सा धागा। इतना मामूली कि उसे देखकर कोई भी कह सकता था.... इसे इतने वर्षों तक बचाकर रखने की क्या जरूरत थी ? लेकिन चीज़ों की जरूरत हमेशा उनके उपयोग से तय नहीं होती। कुछ चीज़ें इसलिए बची रहती हैं क्योंकि उनके भीतर हमारा कोई बीता हुआ रूप साँस ले रहा होता है। अनन्या ने सूत को हथेली पर रख लिया। उसे अचानक रागिनी याद आई। तेईस वर्ष की रागिनी। एक चेहरा जो अब विश्वविद्यालय के गलियारों में नहीं था। एक ...
किन्तु पीड़ा ने किया ।
वह मेरे जन्म से मेरा साथ गहे है ।
वह ईर्ष्यालु चोर
जिसने पहले मेरे खिलौने चुराए
और फिर छोड़ दिया मुझे मेरी रिक्तता के साथ ।
मेरे बाग में चहकती चिड़ियाँ
उसकी अन्तहीन कराहों से डरती हैं ।
उसने मुझसे मेरी मुहब्बत छीन ली जब मुझे उसकी ज़रूरत थी ।
और फिर छोड़ दिया मुझे एकाकी ।
ओ मेरे पीड़ा! मैं तुझसे नाराज़ हूँ, पर
मेरे पास वक़्त नहीं बचा है तुझसे नफ़रत करने का ।
तेरी बलिष्ठ बाँहों में जकड़ कर क़ैद हुई मैं
प्रेम नहीं, बस तुझे ही चाहती हूँ ।
मैरी एलीज़ाबेथ कोलरिज
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